ताजपुर में रविवार को हुए प्रोपर्टी डीलर हत्याकांड के बाद समस्तीपुर पुलिस ने जिस तेजी और गंभीरता से कार्रवाई की, उसने न सिर्फ एक साजिश का पर्दाफाश किया बल्कि एक और संभावित हत्या को भी समय रहते रोक दिया। इस पूरे अभियान की खास बात यह रही कि जिले के पुलिस कप्तान अरविंद प्रताप सिंह खुद देर रात तक मैदान में डटे रहे और छापेमारी की कमान संभाले रखी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में हत्याकांड के पीछे 25 लाख रुपये के लेन-देन का विवाद सामने आया है। इसी कड़ी में पुलिस ने चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि सोमवार को ताजपुर में ही एक अन्य प्रोपर्टी डीलर को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी। लेकिन इससे पहले कि अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब होते, पुलिस ने कार्रवाई कर दी।
रविवार देर रात से शुरू हुई छापेमारी सोमवार तड़के तक चलती रही। इस दौरान अपराधियों ने पुलिस को चकमा देने की भी कोशिश की। छापेमारी के वक्त पिस्टल लेकर दो बदमाश पुलिस के सामने से फरार होने में सफल हो गए, जबकि एक आरोपी के घर से कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस की टीमें फरार बदमाशों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।
इस पूरे अभियान में एसपी अरविंद प्रताप सिंह की सक्रिय भूमिका ने पुलिस महकमे में नई ऊर्जा भर दी। आमतौर पर ऐसे मामलों में वरिष्ठ अधिकारी मॉनिटरिंग तक सीमित रहते हैं, लेकिन यहां एसपी खुद सड़कों पर उतरकर टीम का नेतृत्व करते दिखे। यही वजह रही कि पुलिस न सिर्फ संदिग्धों तक पहुंच सकी, बल्कि एक और हत्या की साजिश को भी समय रहते नाकाम कर दिया।
ताजपुर हत्याकांड के बाद यह साफ हो गया है कि समस्तीपुर पुलिस अपराधियों को खुली छूट देने के मूड में नहीं है। एसपी के सीधे नेतृत्व में की गई कार्रवाई ने यह संदेश भी दे दिया है कि जिले में संगठित अपराध और सुपारी किलिंग जैसी साजिशों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी। पुलिस का अगला फोकस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क के खुलासे पर है।
ताजपुर हत्याकांड और सक्रिय पुलिसिंग की मिसाल
ताजपुर में रविवार को हुए प्रोपर्टी डीलर हत्याकांड ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अपराध के खिलाफ सख्त और तत्पर पुलिसिंग ही असली सुरक्षा है। इस पूरे मामले में समस्तीपुर पुलिस ने जिस तेजी और रणनीति से कार्रवाई की, उसने न केवल चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया बल्कि एक और संभावित हत्या की साजिश को भी समय रहते नाकाम कर दिया।
खास तारीफ़ के काबिल हैं पुलिस कप्तान अरविंद प्रताप सिंह। उन्होंने देर रात तक मोर्चा संभाले रखा और छापेमारी का नेतृत्व स्वयं किया। आमतौर पर वरिष्ठ अधिकारी केवल मॉनिटरिंग तक सीमित रहते हैं, लेकिन पुलिस कप्तान की यह सक्रियता दिखाती है कि वे सिर्फ आदेश देने तक संतुष्ट नहीं हैं। जनता की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था उनके लिए प्राथमिकता है। उनकी तत्परता और साहस ने न सिर्फ टीम को उत्साहित किया बल्कि अपराधियों को भी संदेश दिया कि जिले में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि अपराध केवल कानूनी धाराओं से नहीं, बल्कि समय पर सटीक कार्रवाई और जवाबदेह नेतृत्व से रोका जा सकता है। पुलिस कप्तान अरविंद प्रताप सिंह का यह तरीका जनता के विश्वास को मजबूत करता है और दिखाता है कि अगर अधिकारी सक्रिय और संवेदनशील हों तो अपराधियों के लिए जिले में जगह मुश्किल हो जाती है।
समस्तीपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक मिसाल है कि न केवल अपराध को पकड़ना, बल्कि संभावित हादसों को रोकना भी नेतृत्व की जिम्मेदारी है। जनता की सुरक्षा के लिए ऐसे ही प्रभावी और जवाबदेह नेतृत्व की आवश्यकता हर जिले में महसूस की जानी चाहिए। गौरतलब है कि,देर रात तक सक्रिय रहने और मैदान में खुद उतरने से आमजन को यह भरोसा मिला कि पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए हर समय चौकस है।एसपी की मौजूदगी ने पुलिस टीम को भी हौसला और दिशा दी। उनकी सक्रियता से अधिकारियों और जवानों ने पूरी ताकत के साथ ऑपरेशन में हिस्सा लिया।एसपी ने न केवल मॉनिटरिंग की बल्कि पूरे ऑपरेशन को खुद कमान संभालते हुए अंजाम तक पहुँचाया। यह दिखाता है कि उनके लिए जनता की सुरक्षा सिर्फ दफ्तर में बैठकर आदेश देने तक सीमित नहीं है।